रेप पीड़िता बुलंद इरादों के साथ दिल्ली आई थी। पीड़िता की आंखों में कई ख्वाब और सपने थे। माता-पिता की आर्थिक हैसियत की बदौलत वह दिल्ली नहीं आई थी बल्कि आंखों में पल रहे सपनों ने दिल्ली की राह दिखाए थे। पीड़िता ने अपने भाइयों से वादा किया था कि नौकरी लेकर पूरे परिवार का बोझ वह संभाल लेगी।
सफदरजंग हॉस्पिटल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही लड़की की मां इलाज के लिए विदेश भेजने की मांग कर रही हैं। इस बेटी पर पूरी फैमिली की उम्मीदें टिकी हैं। परिवार पूरी तरह इस पर निर्भर है। बेटी की हालत देख कर मां-बाप बुरी तरह टूट चुके हैं। बिलखती मां ने मांग की है कि किसी भी हालत में बेटी को बचाया जाए। इलाज के लिए विदेश भेजना पड़े तो वह भी किया जाए। घर पर हर वक्त चहकने वाली बेटी खुशमिजाज के साथ ही बेहद मजबूत भी है। न वह किसी से डरती है और न ही गलत बात सहती है। लेकिन अब इसी बेटी की यह हालत देखी नहीं जा जाती।
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